चेहरे पे एक थकन------------
होठों पें सुलगती बीड़ी,
पेट भरने की खातिर--------
सीने से खिचने को पाँव रिक्शा,
बाबू यही है अपना किस्सा।
तपती डामर की सड़क पे,
हम रोज लिखते है अपनी भूख,
बाबू यही है हमारी जिंदगी,
पेट की खातिर-----------
सीने से खिचने को पाँव रिक्शा,
बाबू यही है अपना किस्सा।
कभी किसी पुलिसिये की बेजा गाली,
बीन किराये के उतरना,
चेहरे पे चंद थप्पड़,
और पसीने से भीगे तर-बतर चेहरे को,
मैले गमछे से पोंछना,
फिर आगे बढ़ जाना पिके गुस्सा,
पेट की खातिर--------------
सीने से खिचने को पाँव रिक्शा,
बाबू यही है अपना किस्सा।
छोटे बच्चे बीमार बीबी,टपकती छत
अपनी घर से दुर खुले आसमान तले,
सुलगती बीड़ी फूटपाथ,
और अपने दाहिने हाथ से,
लोहे की सिकड़ी से बांध लगा ताला,
फिर सिरहाने सारी रात खड़ा,
मेरी जिंदगी की तरह पाँव रिक्शा।
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