Tuesday, 30 May 2023

(मुसलमान है, साहब)

ना ही पूजा 
ना ही किसी मस्जिद की ,
अजान है, साहब.!

ये लड़की ,
इस दौर-ए-ग़ालिब की,
दीवान है , साहब!

बड़़े सलीके और 
तमीज़ से ,
लिखा है कई रात ,

ये एक रात हिन्दू
तो एक रात मेरी ,
गज़लों की ----
मुसलमान है , साहब!

@ रंगनाथ द्विवेदी

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