मै देखता हूँ-------------
कभी इस शहर,कभी उस शहर की रात,,,,,
मै देखता हूँ-----------
एक अंजानि मंजील और लंम्बे सफर की रात।
करता हुँ गुफ्त़गु मै हर मील के पत्थर से,,,
कभी उठते है कुहाँसे,कभी उठता है धुँआ,,,
मै जानता हूँ ऐ,रंग-------
क्या है?अगले घर की रात।
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