Friday, 26 May 2023

(औरत इस ज़मी की पहली गज़ल है)

आसमा पे-------------------------
किसी मकबूल शायर से लिखी गई,
औरत------------
इस ज़मी की पहली गज़ल है.

बहुत बाद में तक्सीम हुये है सभी महल,
औरत इस ज़मी पे-----------------
पहली तराशी गई ताज़महल है.

कोई कुछ लिखे या उड़ेल दे खुद को,
पर लिख न सकेगा,
औरत------------------
इस ज़मी के झील की पहली कवल है.

ना हिन्दू बनाया,ना मुसलमान उसने,
गर बनाता तो खता होती,
इसी से ऐ,रंग---औरत----------------
इस ज़मी पे मोहब्बत की पहली शकल है.

आसमा पे------------------
किसी मकबूल शायर से लिखी गई,
औरत-----------------
इस ज़मी की पहली गज़ल है.

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