(पिया आ जाओ)
होली मे दुखे है अंग-अंग------
कि पिया आ जाओ!
भरो पिचकारी से रंगो अंग-अंग-------
कि पिया आ जाओ।
छेड़ो मै छिटकु,भागु फिर पकड़ो,
मै शर्माऊ तेरे सीने से लग,
जीऊँ मै होली के सारे उमंग,तेरे संग-----
कि पिया आ जाओ।
फिर हँसे अँगना और मोरा कंगना,
नथिया करे ननद सी शरारत,
मै हारु तुम जीतो,ये होली की जंग------
कि पिया आ जाओ।
नयनो मे सब कुछ,नयनो मे मदिरा,
आँचल मे महुवा,
और साँसो में महके अमवा की बौर,
कुके है चोली मे कोयल,
कि होली मे सिसके ना हमारी पलंग-----
कि पिया आ जाओ।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758
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