(तु तबाह हो जाये)
मोहब्बत में हमने क्या नही किया?
तु तबाह हो जाये----------
बस ये दुआ नही किया।
तोड़कर मेरा दिले आईना न हँस,
क्योंकि एै बेवफ़ा-------------
तुमने कुछ नया नही किया।
बुझा दिये तुमने चराग ख्वा़हिशो के,
एै बेवफ़ा पहली मर्तबा तुमने-------
मोहब्बत के कमरे मे ये धुआँ नहीं किया।
मेरा ये धोखा-ऐ-क़त्ल है लेकिन,
तु पछतायेगी बेवफ़ा,
क्योंकि वक़्त ने किसी को बख्श़ा नही-----
और किसी को इत्तिला नहीं किया।
मोहब्बत मे हमने क्या नहीं किया?
तु तबाह हो जाये-------------
बस ये दुआ नहीं किया।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.----7800824758
###एक और रचना मोहब्बत के नाम मै आप लोगो के सुपुर्द करता हूं,शायद किसी के जेहन में उभर आये एक एैसी ही कोई सुरत।
No comments:
Post a Comment