Thursday, 15 November 2018

माँ गंगा

जल दिवस के उपलक्ष्य मे माँ गंगा की पीड़ा पे लिखि कविता--------
                    (माँ गंगा)
माँ गंगा----------
अब धरती पे रो रही है!
इसके बेवफ़ा बेटो मे अब,
भगीरथ का किरदार न रहा,
रोज शहर और घर के मैलो से पाट रहे,
उफ!अब गंगा अपने बेटो का प्यार नही,
बल्कि उनके हाथो मिला जहर----------
अपने अंदर शमो रही है,
माँ गंगा-----------
अब धरती पे रो रही है।
देखो इसी का असर है कि,
इसके पानी का पुरा बदन,
जहर से नीला पड़ता जा रहा,
तड़पती गंगा माँ,
अब बह नही रही----------
बल्कि अपनी लाश को बस धो रही है।
माँ गंगा----------
अब धरती पे रो रही है।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर ---222002 (उत्तर--प्रदेश)।
mo.no.----7800824758

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