Thursday, 15 November 2018

कैंडिल नाइट

(कैंडिल नाइट) बहुत उदास है————— आज हमारे तुम्हारे मोहब्बत की, कैंडिल नाईट। मै वही बैठी हूँ ठिक सामने, बस वे जगह खाली है- जहां तुम बैठते थे, आज बहुत उदास है मेरे अंदर जिंदगी, मै टुट रही हूँ! मेरे संग बीत रही है, बस तुम्हारे खूबसूरत यादो की—– कैंडिल नाईट। शायद कही चुक गये हम, इसी से हमारे रिश्ते में गलतफ़हमी बढ़ती गई! तुम अलग हो गये मै अलग हो गई, अब तो अक्सर————– डिनर मेज पे ही रह जाता है, और मै कुर्सी पे बैठी यु ही, गुजार देती हू————- अपनी कैंडिल नाईट। गर गुंजाइश हो तो लौट आओ, एक मर्तबा ही सही मुआफ करने, क्योंकि ऐ,रंग—–कही ऐसा न हो, कि तेरा इंतजार करते-करते, हमेशा के लिये बुझ जाये, मेरी ये कैंडिल नाईट। @@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी। जज कालोनी,मियाँपुर जिला--जौनपुर pin.no.--222002 (उत्तर-प्रदेश) mo.no.-----7800824758

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