Wednesday, 14 November 2018

पिजड़े से आजादी

(पिजड़े से आजादी)
यूँही नही मिली एै दोस्त--------------
गुलाम भारत के पिजड़े की चिड़ियाँ को आजादी।
यूँही नही इसके पर फड़फड़ाये खुले आकाश-----
बहुत तड़पी रोई पिजड़े मे इसके उड़ने की आजादी।
इसने देखा है--------
गोली सिने मे लगी घिसटता रहा खोलने पिजड़े को,
लेकिन खोलने से पहले दम तोड़ गया,
इस आस मे कि मै तो न खोल सका,
पर कोई और खोलेगा एकदिन और दुनिया देखेगी----
इस बंद पिजड़े के चिड़ियाँ की आजादी।
जश्ऩ मे डुबी सुबह होगी तिरंगे फहरेंगे,
जलिया,काकोरी,आजाद,विस्मिल की गाथाये होंगी,
हाँ ! आँख भिगोये देखेगी वही पिजड़े की चिड़ियाँ,
क्योंकि बड़ी मुश्किलो से पाई है एै "रंग"----------
इस चिड़ियाँ ने उस पिजड़े से आजादी।

@@@रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर--प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758

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