Wednesday, 14 November 2018

मै तेरा खत पढ़ता हूँ

(मै तेरा खत पढ़ता हूँ)
मै आज भी-------------------
तुम्हे उतनी ही मुहब्बत करता हूँ!
अक्सर रातो को जलाके चराग,
मै तेरा खत पढ़ता हूँ।
अजीब दिवाना हु मै---------
रात गुजर जाती है बैठे-बैठे,
कभी कहां------------
मै खत को पढ़के मुकम्मल करता हूँ।
मै आज भी-----------------
तुम्हे उतनी ही मुहब्बत करता हूँ!
अक्सर रातो को जला के चराग,
मै तेरा खत पढ़ता हूँ।
मै बेशक------------
छोड़ आया तेरा शहर फिर भी,
मै तेरे खत में सारी रात--------
तेरी गली और तेरा छत पढ़ता हूँ।
मैै आज भी-------------
तुम्हें उतनी ही मुहब्बत करता हूँ!
अक्सर रातो को जलाके चराग----
मै तेरा खत पढ़ता हूँ।

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