(औरत नही देखी) माथे पे चुहचुहाता पसीना----- कमर पे खुशी साड़ी----- और सर पे सीमेंट की भदेली,,,,,,,,,, श्रम की मादक चाल------ ऐ,रंग----मेरी कविता ने कभी---- इतनी खूबसुरत औरत नही देखी।
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