Thursday, 15 November 2018

कलम तवायफ हो गई

(कलम तवायफ़ हो गई)
पुरस्कार की खातिर----------
उसके सीने से दुपट्टा गिर गया,
उफ! अदब को ये दिन भी देखना था,
की दो-कौड़ी की सियासत की खातिर----
सच लिखने वाली कलम तवायफ़ हो गई।
थू मै गुमनाम मर जाऊ कुबूल लेकिन,
मुझे मेरे मालिक बचाये रखना,
वरना किसी गरीब की दहलीज़ का सच कौन लिखेगा?
गर औरो की तरह------------
मेरी कलम भी तवायफ़ हो गई।
इमारत,महफ़िले,रौशनी के उस तरफ
कुछ लाशे है जो दिख नही रही,
ये कुछ एैसे शख्स है,
जो ईधन है इनकी सियासत के,
मै इनकी झूठी तारीफ़ो मे थिरकू भरी बज्म़,
एै "रंग" इसका मतलब है कि हालातो के मद्दे-नज़र----
मेरी कलम भी तवायफ़ हो गई।

@@@रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर (उत्तर-प्रदेश)
पीन नं-----222002  ।
mo.no.-----7800824758

No comments:

Post a Comment