Wednesday, 14 November 2018

आ गया पन्द्रह अगस्त

( आ गया पन्द्रह अगस्त )
इस साल भी------------
बेरोजगार युवाओं का लिये कष्ट,
आ गया पन्द्रह अगस्त.
देखो जितने मे सीमेंट उतने मे ही बालू,
कहाँँ जाये मजूरा,
वे खाली पेट कैसे गायेगा,
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
सच पुछिये तो सारी नीतियों से------
देश का आखिरी व्यक्ति है पस्त.
आ गया पन्द्रह अगस्त.
सब्जियां आसमान छु रही, टमाटर लग रहे अग्रेंज से
जीयसटी केवल कागजी इंकलाब बनके रह गया,
कालाधन भी शिगूफे की तरह आया और चला गया,
और गढ्ढायुक्त सड़कों से गुजरती प्रभातफेरी,
यानि------------
वही पुराने हालात और पुराना वक्त.
आ गया पन्द्रह अगस्त.
ऐ "रंग"  कुछ नही बदलेगा,
क्योंकि हमारी नैतिकता हर रोज मरती है,
हम गुँगे हो जाते है जातियों मे बट,
तो कहां हो पायेगा दुर इस देश से,
शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा जैसी महामारियों का कष्ट.
आ गया पन्द्रह अगस्त.
जरा सोचो-------
उसी पुराने रुटीन की तरह फिर फहरेगा तिरंगा,
और फहरायेगा कौन?
किसी विभाग का कोई मंत्री या उसी विभाग का,
कोई उससे बड़ा भ्रष्ट-----------
आ गया पन्द्रह अगस्त.

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी.
जज कालोनी, मियाँपुर
जिला----जौनपुर pin  no.-----222002(उत्तर--प्रदेश).
Mo.no.----7800824758.

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है।

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