(प्यार की किताब)
हमारे और तुम्हारे प्यार की किताब,
पे महज़ जिम्मेदारियो कि धूल भर पड़ी है!
बाकी तुम वही हो और मै वही हूँ!
हाँ!कुछ पल मिल जाते है जब हम और तुम-----------
मिल के इस किताब की धूल को साफ करते है,
फिर पहले की तरह चमकने लगते है,
हमारे तुम्हारे प्यार के सारे हर्फ,
जिसे हमने-तुमने------
प्यार भरे उन दिनो मे लिखा था,
जब तुम-तुम थी और मै-मै था!
हाँ!याद करो जब घंटो हम,
एक दुसरे की शानो पर अपना सर रंखे,
शाम तलक सपने बुना करते थे,
आज उन्ही सपनो मे रंग भरने के लिये,
हम और तुम---------------
अपने दो मासूम जीवन फूलो की खातिर लगे है!
शायद या यकीनन हम फिर पढ़ेगे पहले की तरह ही----------
एक दूजे की शानो पर अपना सर रंखे,
पुराने दिनो की तरह ही-----------
अपने इस प्यार की किताब।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758
Thursday, 15 November 2018
प्यार की किताब
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