Wednesday, 14 November 2018

बेटी के ब्याह का लिबास दिखाऊँ

(बेटी के ब्याह का लिबास दिखाऊँ)
आओ अय्यासियो मे डुबे हुये चौथे स्तंम्भ,,
तुम्हे इस मूल्क मे रेप से इतर------
खेत के मेड़ पे पड़ी,,,बीना कफ़न,,,,,,,,,,,,
किसान की लाश दिखाऊँ।
बंद कमरे में बरसता सावन------
तीतर-बीतर कपड़े,,पैमाने से छलकी शराब
किसान की आँखो मे सुखा,,,,,,,,,
उसकी दुपट्टे के फंदे से मरी बेटी,,,,,,,,
रुदाली सी बीबी,,,लंम्बा संन्नाटा,,,,,,
उसकी जंग खायी पेटी मे,,ऐ,रंग-------
बेटी के ब्याह का लिबास दिखाऊँ।

खुदकुशी करते किसान और चौथे स्तंम्भ अर्थात पत्रकारो की संवेदन हिनता पे,,लिखी मेरी ज्वलंत रचना।

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