(मुबारक हो नया साल)
मेरा वजुद क्या है?मैने पुछा है नया साल,
क्या शिला यही है कि दर्द ही मिले,
मैने तो दिल के अपने कैनवस पे तुमको,
खिचा है नया साल------------
मेरा वजुद क्या है?मैने पुछा है नया साल।
मैने ख्वा़बो के घरौंदे को कितना सजाया,
पर वे भुले नही भुला,हमे जिनको भुलना था,
उन्ही की याद मे तो शायद,
अपनी अश्को से हमने यारो सिचा है नया साल----------
मेरा वजुद क्या है?मैने पुछा है नया साल।
मुझे मिली है दुरियाँ तोहफ़े मे इंतज़ार,
मै खड़ा हुं अजनबी सा हर कही,
मै जाऊं किधर,क्या पता,मंज़िल कहां,
लो नाम लेके उनका मैने चिखा है नया साल------
मेरा वजुद क्या है? मैने पुछा है नया साल।
पर गिला नही एै दुर के साथी,
मै तो कोसता हूं बस अपनी मुकद्दर को,
बस तुमको खुशी मिले एै शरिके हयात मेरी-----
और मुबारक हो नया साल।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.----7800824758
###हमारा-पूर्वाचल साप्ताहिक समाचारपत्र मे इस छोटे भाई की नये साल पे लिखी रचना को स्थान देने के लिये मै अपने बड़े भाई पाण्डेय जी को हृदय से प्रणाम करता हूं।
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