Thursday, 15 November 2018

अब तो दे दो कफ़न

कफ़न की ख्व़ाहिश लिये अपने महबूब की गलियो से गुजरती एक चाहने वाले की लाश है ये कफ़न------------------(अब तो दे दो कफन)
अब तो दे दो कफन,
अब तो दे दो कफन।
चला ना जाये,जनाजा मोहब्बत का
तेरी गलियो से नंगे बदन।
अब तो दे दो कफन।
ये खामोश है,लब सील से गये है,
दुश्मन भी मईयत मे मिल से गये है,
चली आओ छत पे मिटा दो,अगन।
अब तो दे दो कफन।
अश्को का आना रूक सा गया है,
देखो जमाना भी झुक सा गया है,
क्या खुब रंगत लिये है,लगन।
अब तो दे दो कफन।
शादी के जोड़े मे नागन छिपी है,
हिना से हथेली पे मातम लिखी है,
छिपा लो ये दौलत-
तुम आँचल से अपने
खुशियो को तरसोगी,तुम देख लेना,
होगा तुम्हारा भी ऐसा पतन
ऐ रंग,-थुकेगी तुम पे तब ये कफन।
अब तो दे दो कफन।
अब तो दे दो कफन।

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