Thursday, 15 November 2018

दिया और चराग अलग है

(दिया और चराग अलग है)
इसका शुरुर,इसका मिज़ाज अलग है,
मुहब्बत का रिवाज़ अलग है।
यहां होते है सजदे महबूब के,
यहां की मस्जिद और नमाज़ अलग है।
है ये तन्हाई की चादरपोशी,
यहां की कब्र और मज़ार अलग है।
यहां हर रात उर्स है और धड़कने कौव्वाली,
ऐै "रंग"----यहां दिया और चराग अलग है।

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