Wednesday, 14 November 2018

बिधवा हो गई मधुशाला

(बिधवा हो गई मधुशाला)
बंद करो मंदिर के पुजे,
बंद करो अजान सभी!
शायद तुमको खबर नही----
कि बिधवा हो गई मधुशाला।
आओ-आओ साथ चले हम,
लेके दारु की बोतल!
और एक हाथ में हम प्याला,
ताकि उसकी रुह कहे न,
कि देकर धोखा सब यारो ने,
शायद खुद ही पी डाला।
या रब दे उसको तु ज़न्नत,
जो यार था अपने मैखाने का,
देखो सब पीने वालो ने----
एक-एक ढ़क्कन डाला।
यहाँ अब न रहेगी वे रौनक,
और अब न सज़ेगी वे महफ़िल,
अब तो दर्द सहेगी ये,
भला कौन रहा सुनने वाला।
बंद करो मंदिर के पुजे,
बंद करो अज़ान सभी,
शायद तुमको खबर नही----
कि बिधवा हो गई मधुशाला।

@@सभी पीने वाले मृत आत्माओ को मेरे कलम
की तरफ से एक श्रद्धांजली।

रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी
जज कालोनी, मियाँपुर
जौनपुर---222002 (उत्तर-प्रदेश)
no.no.---7800824758

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